सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

माँ पांढरीपाठ देवी मंदिर,के बारे में

मध्यप्रदे श की लोडी तहसील में स्थित जगजागरण, जग्यवन में पंचखंड गौशाला ग्राम वाली में प्रत्येक वर्ष भक्तजन एकत्रित होकर पंचमी त्रदवस पर जनकल्याण सत्रमत्रत की ओर से हात्रदषक पंचमी पूजा, भजन, कीतषन तथा धात्रमषक औपचाररकता में त्रलप्त रहते हैं। लीला की इस मनोरम और संदर दरबार भक्तजनों के मन को अत्यंत आनंद प्रदान करने वाला दृश्य दे खने को त्रमलता है। प्रभात में त्रवशेर् रूप से पंचमी जनकल्याण सत्रमत्रत द्वारा "श्री गणेश पूजन" त्रियास्थित त्रकया जाता है।

सामात्रजक एवं धात्रमषक मंचों से ख्यात्रत प्राप्त होने के पश्चात् मस्थिर में प्रत्रतवर्ष श्री श्रीमद्भक्त जी एवं श्री लत्रलत जी के सात्रनध्य में सत्य और त्रशव संकल्प लेकर यह आयोजन की जाती है। मालवांचल के ब्रह्मभोज में माताजी की त्रवशेर् कृपा प्राप्त होती है। इस ब्रह्मभोज में माताजी की त्रवशेर् पूजा: पूजन, ५ ब्रह्मभोज एवं त्रदनभर भजन होती है। आरती में केवल भक्तजन ही नहीं अत्रपत ग्रामीणों की अपनी जीत्रवका में बंधी गृहत्रणयां भी भस्थक्तमय होती हैं। यह कोई सामान्य आयोजन नहीं अत्रपत यह संयोग है।आज भक्तजन कक्षाओं की त्रनकट आकर इस आयोजन को सफल बनाने हेत भजन-कीतषन में सहभात्रगता करते हैं। मंत्रदर के संिापक श्री श्री लत्रलतलाल जी, डॉ. सरे श दशोरा जी तथा श्री रमेश शमाष जी इस आयोजन के त्रलए त्रवशेर् सत्रियता रखते हैं।आज भक्तजन कक्षाओं की त्रनकट आकर इस आयोजन को सफल बनाने हेत भजन-कीतषन में सहभात्रगता करते हैं। मंत्रदर के संिापक श्री श्री लत्रलतलाल जी, डॉ. सरे श दशोरा जी तथा श्री रमेश शमाष जी इस आयोजन के त्रलए त्रवशेर् सत्रियता रखते हैं।भारत के वररष्ठतम नागररकों यथा कक्कड जी, अंबालाल पिाल जी, वररष्ठ नागररकों का सहयोग रहता है। इसका कलात्मक दृश्य भक्तजन के उपवन पर एक प्राकृत्रतक दीस्थप्त दे ता है।

यहााँ पंचमी उत्सव एवं त्रवशेर् आयोजन समय अनसार संचात्रलत त्रकया जाता है । शरीर पर त्रकसी की बेटी का त्रववाह हो या त्रफर कोई अन्य कायष, सभी द्वारा हर संभव मदद की जाती है।गौशाला एवं नारायण सेवा में आप भी अपना सहयोग प्रदान कर सकते हैं।म ॅॅं लोढीखण्ड दे र्ी आपकी मनोक मन पूिव करें ।

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भक्तिभाव से भरा हमारा मंदिर – देखें कुछ पावन क्षण

प्रेम, सेवा और शांति से भरी हमारी गोशाला

हमारी गोशाला – जहाँ हर साँस में बसती है गौमाता की करुणा

वैत्रदक और सनातन धमष में गौशाला का अत्यंत महत्व बताया गया है। आयोजन के अंतगषत में साता के पश्चात् ग्रामीणों ने गौशाला का संचालन संभाला है। पस्तक "पद्म पराण" में त्रलखा गया है त्रक गौशाला में सौ से अत्रधक गौमाताएं धूप-छााँव दोनों जगह गोपालन करती हैं । इसमें गौमाताओं के त्रनयत्रमत रूप से "खराक" का ध्यान त्रदया जाता है।

गौमाताओं के त्रलए त्रनयत्रमत यािा-खाना कर उनका भोग तय कर तेल समत्रपषत त्रकया जाता है । त्रजस कारण से गौमाताओं के स्वास्थ्य के प्रत्रत त्रवशेर् ध्यान त्रदया जाता है।यहााँ प्रत्येक व्यस्थक्त - अत्रगत्रन, क्या त्रछपा मेरा" शब्द त्रनरं तर गाते हुए गौशाला की प्रदत्रक्षणा करता है।यहााँ के नीचे की ओर आते ही गायों ही गायों का दृश्य और सेवा का अद् भत दृश्य त्रदखाई दे ता है । गौमाताओं से प्रेम करने वाले प्रत्येक व्यस्थक्त के त्रलए गौशाला िल पर प्रत्रतत्रदन खास के रूप में प्रत्रसद्ध गोपाल स्वयं उपस्थित होते हैं ।

यहााँ पर पस्थित परुर्ोत्तम गोपाल के त्रनदे शन में गौमाता सेवा की त्रनयत्रमत व्यविा होती है । संिापक डॉ. सरे श दशोरा के सात्रिध्य में मंत्रदर पररसर में गौशाला के दशषन हे त त्रवशेर् दृत्रि जाती है।गौशाला एवं नारायण सेवा में आप भी अपना सहयोग प्रदान कर सकते हैं।म ॅॅं लोढीखण्ड दे र्ी आपकी मनोक मन पूिव करें ।

हर दिन लगती है श्रद्धालुओं की भीड़ – माँ पांढरीपाठ देवी मंदिर का अद्भुत वीडियो

हमारे आश्रम का पता

श्री रेखलाल कवरे, S/O झनकलाल कावड़े वार्ड क्रमांक 6, वारी, पिनकोड - 481222

जिला - बालाघाट (मध्य प्रदेश)

माँ पांढरीपाठ देवी मंदिर

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